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लखनऊ: जीएसटी दर कम करने की मांग को लेकर 17 तक ईंटों की बिक्री बंद, मालिकों ने संघर्ष तेज करने का किया फैसला

लखनऊ: यूपी के लोगों का अब अपना घर बनाने का सिलसिला थोड़े दिन के लिए रोकना पड़ेगा, क्योंकि घर बनाने के लिए ईंट जरूरी है, पर ईंट भट्ठा मालिक, ऑल इंडिया ब्रिक एंड टाइल मैन्युफैक्चरर्स फेडरेशन व उप्र ईंट निर्माता समिति की तरफ से 12 से 17 सितंबर तक ईंटों की बिक्री रोकने का फैसला लिया गया है।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि समस्याओं के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन की मांग है कि भट्ठे में निर्मित लाल ईंटों पर जीएसटी दर में 240 से 600 प्रतिशत की वृद्धि वापस हो, भट्ठों को उचित दर का कोयला उपलब्ध हो, खुले बाजार में कोयले में सरकारी कीमत के सापेक्ष तीन गुना तक जारी ब्लैक मार्केटिंग पर अंकुश लगे, ईंट मिट्टी निकासी के लिए मशीनों के प्रयोग की सुलभ नीति बनाने तथा भट्ठों को नेचुरल ड्राफ्ट में परिवर्तित करने के लिए कम से कम चार वर्ष का समय मिले। इसी के लिए भट्ठा बंदी की घोषणा कर हड़ताल पर रहने को मजबूर हैं।

संगठन के महामंत्री मुकेश मोदी ने कहा कि ईंट भट्ठा उद्योग के साथ मनमाना व्यवहार किया जा रहा है। संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने बताया है कि जो कोयला विगत सीजन में सात हजार रुपये प्रति टन से 9 हजार रुपये प्रति टन में मिलता था, वह कोयला 2021-22 सीजन में 18000 रुपये प्रति टन से लेकर 27000 रुपये प्रति टन में भट्ठे वाले खरीदने को विवश हैं। सरकारी कोटे के कोयले का आयात बिल्कुल बंद है। इस प्रकार ईंटों की उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हो गई है और ईंटों की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसी के लिए हम भट्ठा बंदी की घोषणा कर हड़ताल पर रहने को मजबूर हैं।

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