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यूपी: बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ लखनऊ से लेकर नोएडा तक बने हाथियों की मूर्ति पर याचिका दायर, रिकवरी की मांग

मायावती: बसपा सुप्रीमो राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि मायावती के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में सरकारी धन के दुरुपयोग का तर्क देते हुए इस धन की रिकवरी बसपा सुप्रीमो की संपत्ति से किए जाने को लेकर की गई है। याचिकाकर्ता का मानना है कि मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सरकारी धन का दुरुपयोग किया। योजनाओं के नाम पर आय से अधिक संपत्ति भी अर्जित की गई।

इस मामले में सपा नेता अभिषेक सिंह की याचिका पर सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय ने मंजूरी दे दी है। इस याचिका में मायावती के अलावा प्रदेश सरकार के पूर्व गृहमंत्री और वित्त मंत्री को प्रतिवादी बनाया गया है। अभिषेक ने याचिका में कहा कि अलग-अलग मामलों में मायावती के खिलाफ जांच हुई थी। लखनऊ और नोएडा में बड़ी संख्या में पार्टी के प्रतीक चिह्न हाथी की प्रतिमा स्थापित करा सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया गया। उनकी सरकार में कई घोटाले भी हुए।

पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर तमाम स्मारक बनवाए गए लेकिन इनका कोई उपयोग नहीं हुआ। इनका उद्देश्य सिर्फ धन कमाना रहा। कई मामलों में जांच के दौरान दिल्ली, कोलकाता में बेनामी संपत्ति भी पाई गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि मामलों की सुनवाई के दौरान कई साल पहले उच्चतम न्यायालय ने मायावती से रिकवरी का आदेश दिया था।

मायावती के बाद अखिलेश यादव और फिर योगी आदित्यनाथ की सरकार आई लेकिन दोनों ही सरकारों ने शीर्ष अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं कराया। अब उन्होंने उन आदेशों और अलग-अलग जांचों का हवाला देते हुए रिकवरी की मांग करने के लिए याचिका दाखिल की है।

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